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Friday, 31 July 2020

नई शिक्षा नीति-2020 (New Education Policy-2020)

नई शिक्षा नीति-2020 (New Education Policy-2020)

नई शिक्षा नीति 2020 NEP = National Education Policy.2020


29 जुलाई 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई।

• नई शिक्षा नीति, 1986 की शिक्षा नीति का स्थान लेगी।
• 1986 की शिक्षा नीति को 1992 में संशोधित किया गया था।

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के निम्नलिखित पांच स्तंभ बताएं है -

नई शिक्षा नीति 2020 

1. एक्सेस (सब तक पहुंच)

2. इक्विटी (भागीदारी)
3. क्वालिटी (गुणवत्ता)

4. अफॉर्डेबिलिटी (किफायत)

5. अकाउंटेबिलिटी (जवाबदेही)

• साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के तहत इसमें संस्कृत समेत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।

• कुल 27 मुद्दे इस नीति में उठाये गए है जिनमे से 10 मुद्दे स्कूल शिक्षा से सम्बंधित, 10 उच्च शिक्षा से सम्बंधित और 7 अन्य महत्वपूर्ण शिक्षा से जुड़े विषय है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर पहले परामर्श प्रक्रिया चलाई गयी थी, जो कि 26 जनवरी 2019 से 31 अक्टूबर 2019 तक चली थी।

पूर्व इसरो प्रमुख के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने इसका मसौदा तैयार किया है।
इस समिति ने 31 मई 2019 को अपनी रिपोर्ट दी थी।


• पीएम मोदी की ओर से समीक्षा के बाद सरकार ने कहा था कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।

पहली शिक्षा नीति - 1968
स्वतंत्रता के बाद पहली बार 1968 में पहली शिक्षा नीति की घोषणा की गई थी। यह कोठारी कमीशन (1964-66) की सिफारिशों पर आधारित थी। इस नीति को इंदिरा गांधी सरकार ने लागू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कराना और देश के सभी नागरिकों को शिक्षा मुहैया कराना था।

दूसरी शिक्षा नीति - 1986
देश की दूसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति मई 1986 में राजीव गांधी सरकार के समय लागू की गई।
यह नीति शिक्षा के आधुनिकीकरण पर केंद्रित थी। (संस्थानों को आधारभूत संरचना जैसे- कंप्यूटर, पुस्तकालय जैसे संसाधन उपलब्ध कराना)
इस नीति को 1992 में पीवी नरसिंह राव सरकार ने संशोधित किया।

मानव संसाधन मंत्रालय को अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा।
गौरतलब है कि 1985 में राजीव गांधी सरकार के दौरान शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय रखा गया था। उसी साल पहले मानव संसाधन विकास मंत्री पी वी नरसिम्हा राव बने थे।


नई शिक्षा नीति की मुख्य विशेषताएं-

एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम लाया जाएगा जिसका फोकस कई भाषाओं, 21वीं सदी की कुशलता, खेल और कला आदि के समावेश पर होगा।


स्कूली शिक्षा के लिए 5+3+3+4 फॉर्मूला
10+2 के ढांचे को 5+3+3+4 के चार स्तर में बदला जाएगा।
पहला चरण - 3 साल प्री-स्कूल और 2 साल पहली व दूसरी कक्षा की पढ़ाई होगी।
दूसरा चरण - तीसरी से पांचवी कक्षा
तीसरा चरण - छठी से आठवीं कक्षा
चौथा चरण - 9वीं से 12वीं कक्षा

10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं होती रहेंगी।

क्षेत्रीय भाषाओं पर होगा जोर

कक्षा 6 से 8 तक क्षेत्रीय भाषाओं के ज्ञान पर अत्यधिक जोर दिया गया है।
कक्षा 6 से 8 वीं के बीच कम से कम दो साल का लैंग्वेज कोर्स करना प्रस्तावित है। Coding, logics आदि की शिक्षा इसी स्तर से बच्चों को दी जाएगी ताकि बुद्धिमता का विकास इसी उम्र से हो।


बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान-

• अर्ली चाइल्डहुड केयर एवं एजुकेशन (ECCE) के लिए कैरिकुलम एनसीईआरटी द्वारा तैयार होगा। इसे 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए विकसित किया जाएगा और उन्हें को खेल आधारित स्कूलिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

• बुनियादी शिक्षा (6 से 9 वर्ष के लिए) के लिए बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान पर नेशनल मिशन शुरु किया जाएगा। (फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमेरेसी)
नई शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य सुनिश्चित करना है कि कक्षा तीन तक के प्रत्येक विद्यार्थी को 2025 तक बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान हासिल कर लेना चाहिए।


मनचाहा विषय पढ़ने की छूट
9वींं से 12वींं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी।

कक्षा 9 से 12 के बीच सब कुछ बदल चुका है आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस स्ट्रीम जैसी कोई बात नहीं रह जाएगी।

बच्चे कोई भी विषय अपने हिसाब से चुन सकते हैं। वह अगर इतिहास पढ़ना चाहता है तो साथ में एकाउंट्स, केमिस्ट्री कुछ भी पढ़ सकता है।


रिपोर्ट कार्ड

एक व्यापक बदलाव बच्चों की रिपोर्ट कार्ड में देखने को मिलेगा। पहले रिपोर्ट कार्ड स्कूल के टीचर प्रिंसिपल द्वारा तैयार करके अभिभावक को दिए जाते थे। मगर अब बच्चा उस रिपोर्ट कार्ड में खुद का असेसमेंट करेगा, उसके बाद उसके सहपाठी उसका एसेसमेंट करेंगे, तब जाकर स्कूल के टीचर्स परफॉर्मेंस, स्किल्स के आधार पर उनका रिपोर्ट कार्ड बनाएंगे।

व्यवसायिक शिक्षा (Vocational Education)
वोकेशन एजुकेशन के एकीकरण के लिए
शिक्षा मंत्रालय, व्यावसायिक शिक्षा के एकीकरण के लिए एक राष्ट्रीय समिति लोक विद्या (NCIVE) का गठन करेगा। लोक विद्या, अर्थात भारत में विकसित महत्वपूर्ण व्यावसायिक ज्ञान, छात्रों के लिए सुलभ बनाया जाएगा। 

कक्षा 6 से वोकेशनल ट्रेनिंग करवाई जाएगी। इसके लिए इंटर्नशीप करवाई जाएगी।

नई शिक्षा नीति के तहत म्यूजिक, आर्ट्स और वोकेशन एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। इन्हें पाठ्यक्रम में लागू करवाया जाएगा‌।


उच्च शिक्षा का स्तर बढ़ाया जाएगा-
क्रिएटिव कॉम्बिनेशन के साथ छात्रों को विषय बदलने का मौका मिलेगा।
सरकारी व निजी उच्च शिक्षण संस्थानों पर एक ही तरह के नियम लागू होंगे।
सभी उच्च शिक्षण संस्थानों या कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा होगी जिससे समय और धन दोनों बचेगा। (कॉमन एंट्रेंस एग्जाम)
यह परीक्षा एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) लेगी। इस एजेंसी का गठन पहले ही हो चुका है।

फीस की अधिकतम सीमा तय होगी-
कौन सा संस्थान किस कोर्स की कितनी फीस रख सकता है इसका मानक तैयार होगा। अधिकतम फीस तय की जाएगी जो उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा दोनों के लिए होगी।
इसके दायरे में निजी और सरकारी दोनों ही संस्थान आएंगे।

बीएड कॉलेज बंद होंगे-
2030 तक अध्यापन के लिए 4 वर्ष के न्यूनतम इंटीग्रेटेड b.ed की डिग्री जरूरी की जाएगी। b.ed कॉलेज बंद होंगे सामान्य कॉलेज से ही b.ed होगा।

डिग्री व्यवस्था-
वहीं कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी यानि कि ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी।

3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है, जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है।
वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी। 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में MA कर सकेंगे, अब स्‍टूडेंट्स को  MPhil नहीं करना होगा, बल्कि MA के छात्र अब सीधे PHD कर सकेंगे।

बहुस्तरीय प्रवेश एवं निकासी व्यवस्था-
उच्च शिक्षा में बहुस्तरीय प्रवेश एवं निकासी व्यवस्था होगी।
इसके तहत यदि विद्यार्थी चाहे तो वह एक सेमेस्टर, 1 साल, 2 साल या 3 साल बाद पढ़ाई छोड़ सकता है। विद्यार्थी को 1 साल की पढ़ाई पर सर्टिफिकेट, 2 साल की पढ़ाई पूरी करने पर डिप्लोमा और 3 या 4 साल की पढ़ाई पूरी करने पर डिग्री दी जाएगी।
इसके बाद विद्यार्थी कुछ सालों के अंतराल के बाद यदि अपनी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहेगा तो उसे वहीं से प्रवेश मिल जाएगा जहां से उसने पढ़ाई छोड़ी थी।

नौकरी करने पर डिग्री में 1 साल की छूट-
जो नौकरी करना चाहते हैं वे 3 साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे। 1 साल के एमए के साथ 4 साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी कर सकते हैं।

एक ही नियामक-
1986 की शिक्षा नीति के तहत अब तक उच्च शिक्षा में कहीं नियामक अलग-2 कार्य कर रहे हैं। जैसे - यूजीसी, AICTE, भारतीय वास्तु कला परिषद, भारतीय फार्मेसी परिषद, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद आदि।
लेकिन अब नई शिक्षा नीति में विधि और चिकित्सा शिक्षा को छोड़कर बाकी पूरी उच्च शिक्षा को एक ही नियामक के अंदर लाने का निर्णय किया गया है।
पूरी उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय उच्च शिक्षा नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा।

भाषा
• नई शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा।
बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा।
• 1986 की शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा अंग्रेजी में ही करनी होती है लेकिन अब नई शिक्षा नीति 2020 के तहत हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं के अलावा 8 क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई-कोर्स शुरू किए जा सकेंगे।

बोर्ड परीक्षा
बोर्ड परीक्षा को दो भागों में बांटा जा सकता है जो वस्तुनिष्ठ और विषय आधारित हो सकता है। विषयों को कठिन और सरल के रूप में बांटा जा सकेगा। रोजमर्रा की जिंदगी से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे।

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ)

राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF) स्थापित किया जाएगा। एनआरएफ का लक्ष्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बढ़ाना होगा।
एनआरएफ में विज्ञान के साथ सामाजिक विज्ञान भी शामिल होगा। यह बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा।


शिक्षकों का पाठ्यक्रम
एनसीटीई (NCTE) एनसीईआरटी के साथ मिलकर अध्यापक शिक्षण के लिए नया नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर टीचर एजुकेशन 2021 तैयार करेगा।

विदेशी यूनिवर्सिटी
शीर्ष रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटीज को ही भारत में कैंपस खोलने की इजाजत दी जाएगी।

• उच्च शिक्षा के सकल नामांकन दर (GER) को 2035 तक 26 से 50% तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

• 2020 के बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए 99,300 करोड रुपए आवंटित किए गए।


नया शैक्षिक सत्र कोरोना के कारण सितंबर-अक्टूबर में शुरू हो सकता है।

सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक ही नियामक होगा और एमफिल को बंद कर दिया जाएगा।

सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6% शिक्षा में लगाया जाए जो अभी 4.43% है. इसमें बढ़ोतरी करके शिक्षा का क्षेत्र बढ़ाया जाएगा।

SSRA (State School Regulatory Authority) बनेगी जिसके चीफ शिक्षा विभाग से जुड़े होंगे।

ECCE (Early Childhood Care and Education) के अंतर्गत प्री प्राइमरी शिक्षा आंगनबाड़ी और स्कूलों के माध्यम से।

शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से हटाया जाएगा, सिर्फ चुनाव ड्यूटी लगेगी, BLO ड्यूटी से शिक्षक हटें हटेंगे मिड डे मील से भी शिक्षक हटेंगे।

स्कूलों में एसएमसी/एसडीएमसी के साथ SCMC यानी स्कूल कॉम्प्लेक्स मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाएगी।

नई ट्रांसफर पॉलिसी आयेगी जिसमें ट्रांसफर लगभग बन्द हो जाएंगे, ट्रांसफर सिर्फ पदोन्नति पर ही होंगे।

मिड डे मील के साथ हैल्थी ब्रेकफास्ट भी स्कूलों में दिया जाएगा।

NCERT पूरे देश में नोडल एजेंसी होगी।

स्कूलों में राजनीति व सरकार का हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।

क्रेडिट बेस्ड सिस्टम होगा जिससे कॉलेज बदलना आसान और सरल होगा बीच मे कोई भी कॉलेज बदला
जा सकता है।

मानव संसाधन मंत्रालय को अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा।

शिक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए उच्च गुणवत्ता और व्यापक शिक्षा तक सबकी पहुँच सुनिश्चित की गई है। इसके जरिए भारत का निरंतर विकास सुनिश्चित होगा साथ ही वैश्विक मंचों पर - आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, समानता और पर्यावरण की देख - रेख, वैज्ञानिक उन्नति और सांस्कृतिक संरक्षण के नेतृत्व का समर्थन करेगा।


भारत का ‘विश्वगुरु’ एवं ‘आत्मनिर्भर’ बनने का सपना पूर्ण होने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

1 comment:

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